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18 मई 2017

गज़ल ...ग्राम ...कविता ....डॉ.ओ.पी.व्यास ..ग्रामों के लोग अभावों में जी रहे | फटे छने कपड़ों सी तार तार ज़िन्दगी ,कितने श्रम से देखो सीं रहे ||

  गज़ल
ग्राम ...कविता ...    डॉ.ओ.पी.व्यास     [  गुरुवार 9 मार्च  1978] ..प्रकाशित रचना वीर अभिमन्यु स्वतंत्रता दिवस विशेषांक ]
ग्रामों के लोग अभावों में जी रहे |
अभागे अभावों से त्रस्त ही रहे ||
        फटे ,छने कपड़ों सी ,तार तार ज़िन्दगी ,
        कितने   श्रम   से,  देखो   इसे  सीं  रहे ||

17 मार्च 2014

होली ....डॉ . ओ.पी .व्यास गुना म. प्र.

होली 
हैं वे  किसी के और किसी के  साथ  में  होली। 
मनाएं प्यार से मनुहार से , हर हाथ में होली॥ 
शकल भोली है ,झोली में मगर है  भंग की गोली। 
अजब है चाल में मस्ती ,अजी हर बात में होली ॥ 
जो कल तक मिल नहीं सकते थे दिन के उजाले में। 
वो सुनते हैं मनाते हैं आजकल   रात में होली॥ 
वो जीते हैं होली को ,वो पीते हैं होली को । 
घुसी नस नस में है होली ,अजी हर जात में होली ॥ 
जो रूठे थे जनम भर के ,जो बैठे थे कसम करके। 
गिले शिकवे गये हैं भूल , आई  मुस्कात में होली॥ 
अमलताशों पे  है होली  ,पलाशों पर भी है  होली. 
फूले झूमते कचनार हैं ,है अब हर पात में होली॥ 
करें है आस , निकले फ़ांस ,रही जो आंस जन्मों से । 
मिटे वो प्यास ,कहता ''व्यास '' हो हर गात में होली॥ 

26 फ़र॰ 2014

गज़ल ...हम खुद परस्त कितने ...डॉ .ओ .पी . व्यास

गजल

हम खुद परस्त कितने दुनियाँ में हो रहे हैं ।
ख़ुद की   खुदी में डूबे ,खुद में ही खो रहे हैं ॥

हम चाहते हैं दुनियाँ सजदा करे हमारा ,
ओहदों को अपने अपनी पीठों पै ढो रहे हैं ॥

दुनिया ने ली अँगड़ाई और जाग चुकी कब से ,
हम ख़्वाब की दुनियाँ में सपने सँजो रहे हैं ॥

बाग ए वफा की खाक कर दे खाद चमन में ,
हम बेवफाइओ के काँटों को बो रहे हैं ॥

जिनसे हमें सुकूँ की उम्मीद थी थोड़ी सी ,
देखा करीब से तो वे खुद ही रो रहे हैं ॥

उम्मीद '' व्यास '' उनसे किस तरह हो भंवर में ,
साहिल पै ही जो किश्ती खुद की डुबो रहे हैं ॥

                  डॉ .ओ .पी .व्यास गुना म.प्र.



3 मार्च 2012

गजल -शहीदों के नाम

गजल 
शहीदों के नाम 
अशफाक आरज़ू को पूरी ना कर सके हम;
ख़ाक ए वतन कफ़न में तेरे ना धर सके हम!

जो जला है चिराग़ उस का निशां बाक़ी है;
जमीं वही है,और वही आसमां बाक़ी है!

रहा ना कुछ भी तो बाक़ी है,अब जमाने में,
जाम तो खाली हुआ दर्द ए *निहाँ बाक़ी है!

डॉ. ओ. पी. व्यास ..नई सडक गुना म.प्र. भारत 
-ब्राम्पटन ओंटारियो कनाडा से दि.- ६/५/२०११ 
*[छिपा हुआ दर्द ]

भृतहरि नीति शतक का काव्यानुवाद