गज़ल
ग्राम ...कविता ... डॉ.ओ.पी.व्यास [ गुरुवार 9 मार्च 1978] ..प्रकाशित रचना वीर अभिमन्यु स्वतंत्रता दिवस विशेषांक ]
ग्रामों के लोग अभावों में जी रहे |
अभागे अभावों से त्रस्त ही रहे ||
फटे ,छने कपड़ों सी ,तार तार ज़िन्दगी ,
कितने श्रम से, देखो इसे सीं रहे ||
ग्राम ...कविता ... डॉ.ओ.पी.व्यास [ गुरुवार 9 मार्च 1978] ..प्रकाशित रचना वीर अभिमन्यु स्वतंत्रता दिवस विशेषांक ]
ग्रामों के लोग अभावों में जी रहे |
अभागे अभावों से त्रस्त ही रहे ||
फटे ,छने कपड़ों सी ,तार तार ज़िन्दगी ,
कितने श्रम से, देखो इसे सीं रहे ||
