145 श्लोक क्र.9 ...
कीड़ों युक्त , क्लिन्न लार से ,
दुर्गन्धित , गन्दी , रस हीन |
कुत्ता मानव अस्थि चाबता ,
समझ रहा इन्द्र को दीन ||
प्रकट यही होता है इससे ,
नीच जीव जिसे करे ग्रहण |
ध्यान नहीं है , निम्न वस्तु पर ,
कितने इस में हैं अवगुण ||
कीड़ों युक्त , क्लिन्न लार से ,
दुर्गन्धित , गन्दी , रस हीन |
कुत्ता मानव अस्थि चाबता ,
समझ रहा इन्द्र को दीन ||
प्रकट यही होता है इससे ,
नीच जीव जिसे करे ग्रहण |
ध्यान नहीं है , निम्न वस्तु पर ,
कितने इस में हैं अवगुण ||